वन पर्व  अध्याय २४०

वैशम्पाय़न उवाच

कर्णं संशप्तकांश्चैव पार्थस्यामित्रघातिनः |  ३०   क
अमन्यत वधे युक्तान्समर्थांश्च सुय़ोधनः ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति