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वन पर्व
अध्याय २४०
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वैशम्पाय़न उवाच
संशप्तकाश्च ते वीरा राक्षसाविष्टचेतसः |  ३३   क
रजस्तमोभ्यामाक्रान्ताः फल्गुनस्य वधैषिणः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति