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शान्ति पर्व
अध्याय २४१
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व्यास उवाच
न भवति विदुषां महद्भय़ं; यदविदुषां सुमहद्भय़ं भवेत् |  १२   क
न हि गतिरधिकास्ति कस्य चि; द्भवति हि या विदुषः सनातनी ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति