शान्ति पर्व  अध्याय २४१

व्यास उवाच

लोकमातुरमसूय़ते जन; स्तत्तदेव च निरीक्ष्य शोचते |  १३   क
तत्र पश्य कुशलानशोचतो; ये विदुस्तदुभय़ं कृताकृतम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति