वन पर्व  अध्याय २४१

कर्ण उवाच

तवाद्य पृथिवी वीर निःसपत्ना नृपोत्तम |  १६   क
तां पालय़ यथा शक्रो हतशत्रुर्महामनाः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति