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वन पर्व
अध्याय २४१
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वैशम्पाय़न उवाच
रोचते मे वचः कृत्स्नं व्राह्मणानां न संशय़ः |  ३५   क
रोचते यदि युष्माकं तन्मा प्रव्रूत माचिरम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति