वन पर्व  अध्याय २८२

सावित्र्यु उवाच

मृत्युर्मे भर्तुराख्यातो नारदेन महात्मना |  ३७   क
स चाद्य दिवसः प्राप्तस्ततो नैनं जहाम्यहम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति