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वन पर्व
अध्याय २४१
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रत्यक्षं तव गान्धारे ससैन्यस्य विशां पते |  ६   क
सूतपुत्रोऽपय़ाद्भीतो गन्धर्वाणां तदा रणात् |  ६   ख
क्रोशतस्तव राजेन्द्र ससैन्यस्य नृपात्मज ||  ६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति