शान्ति पर्व  अध्याय २४२

व्यास उवाच

ज्ञानदीपेन दीप्तेन पश्यत्यात्मानमात्मना |  १०   क
दृष्ट्वा त्वमात्मनात्मानं निरात्मा भव सर्ववित् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति