शान्ति पर्व  अध्याय २४२

व्यास उवाच

यथा पुष्पफलोपेतो वहुशाखो महाद्रुमः |  ८   क
आत्मनो नाभिजानीते क्व मे पुष्पं क्व मे फलम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति