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वन पर्व
अध्याय २४३
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वैशम्पाय़न उवाच
भ्रातॄणां च प्रिय़ं राजन्स चकार परन्तपः |  २४   क
निश्चित्य मनसा वीरो दत्तभुक्तफलं धनम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति