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शान्ति पर्व
अध्याय २४५
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व्यास उवाच
विदित्वा सप्त सूक्ष्माणि षडङ्गं च महेश्वरम् |  १४   क
प्रधानविनिय़ोगस्थः परं व्रह्माधिगच्छति ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति