वन पर्व  अध्याय २४५

वैशम्पाय़न उवाच

सत्यवादी लभेताय़ुरनाय़ासमथार्जवी |  २१   क
अक्रोधनोऽनसूय़श्च निर्वृतिं लभते पराम् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति