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शान्ति पर्व
अध्याय २४६
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व्यास उवाच
तन्मनः कुरुते सख्यं रजसा सह सङ्गतम् |  १५   क
तं चादाय़ जनं पौरं रजसे सम्प्रय़च्छति ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति