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अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
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अग्निरु उवाच
तदा स वारुणः ख्यातो भृगुः प्रसवकर्मकृत् |  ३४   क
आग्नेय़स्त्वङ्गिराः श्रीमान्कविर्व्राह्मो महाय़शाः |  ३४   ख
भार्गवाङ्गिरसौ लोके लोकसन्तानलक्षणौ ||  ३४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति