शान्ति पर्व  अध्याय २४७

भीष्म उवाच

चलोपपत्तिर्व्यक्तिश्च विसर्गः कल्पना क्षमा |  ९   क
सदसच्चाशुता चैव मनसो नव वै गुणाः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति