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वन पर्व
अध्याय २४७
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देवदूत उवाच
त्रय़स्त्रिंशदिमे लोकाः शेषा लोका मनीषिभिः |  २५   क
गम्यन्ते निय़मैः श्रेष्ठैर्दानैर्वा विधिपूर्वकैः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति