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वन पर्व
अध्याय २४७
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देवदूत उवाच
अय़ं त्वन्यो गुणः श्रेष्ठश्च्युतानां स्वर्गतो मुने |  ३३   क
शुभानुशय़योगेन मनुष्येषूपजाय़ते ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति