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वन पर्व
अध्याय २४७
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देवदूत उवाच
तत्र गच्छन्ति कर्माग्र्यं कृत्वा शमदमात्मकम् |  ५   क
लोकान्पुण्यकृतां व्रह्मन्सद्भिरासेवितान्नृभिः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति