menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
chevron_left
chevron_right
याज्ञवल्क्य उवाच
पाषाण इव मेघोत्थैर्यथा विन्दुभिराहतः |  २०   क
नालं चालय़ितुं शक्यस्तथा युक्तस्य लक्षणम् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति