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शान्ति पर्व
अध्याय २४८
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भीष्म उवाच
करवाण्यद्य कं कामं वरार्होऽसि मतो मम |  २१   क
कर्ता ह्यस्मि प्रिय़ं शम्भो तव यद्धृदि वर्तते ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति