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शान्ति पर्व
अध्याय २४९
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नारद उवाच
उपसंहरतस्तस्य तमग्निं रोषजं तदा |  १५   क
प्रादुर्वभूव विश्वेभ्यः खेभ्यो नारी महात्मनः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति