स्त्री पर्व  अध्याय २५

गान्धार्यु उवाच

काम्वोजं पश्य दुर्धर्षं काम्वोजास्तरणोचितम् |  १   क
शय़ानमृषभस्कन्धं हतं पांसुशु माधव ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति