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शान्ति पर्व
अध्याय २५
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वैशम्पाय़न उवाच
तरसा वुद्धिपूर्वं वा निग्राह्या एव शत्रवः |  १५   क
पापैः सह न सन्दध्याद्राष्ट्रं पण्यं न कारय़ेत् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति