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शान्ति पर्व
अध्याय २५
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वैशम्पाय़न उवाच
व्यवहारेषु धर्म्येषु निय़ोज्याश्च वहुश्रुताः |  १७   क
गुणय़ुक्तेऽपि नैकस्मिन्विश्वस्याच्च विचक्षणः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति