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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषां तु तरसा पार्थस्तत्रैव परिधावताम् |  १४   क
विजहारोत्तमाङ्गानि भल्लैः संनतपर्वभिः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति