अनुशासन पर्व  अध्याय २५

भीष्म उवाच

इति पृष्टो महाराज पराशरशरीरजः |  ४   क
अव्रवीन्निपुणो धर्मे निःसंशय़मनुत्तमम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति