आश्रमवासिक पर्व  अध्याय २५

वैशम्पाय़न उवाच

एवं स तपसा राजा धृतराष्ट्रो महामनाः |  १४   क
योजय़ामास चात्मानं तांश्चाप्यनुचरांस्तदा ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति