menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
क्षत्ता च धर्मार्थविदग्र्यवुद्धिः; ससञ्जय़स्तं नृपतिं सदारम् |  १८   क
उपाचरद्घोरतपो जितात्मा; तदा कृशो वल्कलचीरवासाः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति