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सभा पर्व
अध्याय २५
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वैशम्पाय़न उवाच
न चापि किञ्चिज्जेतव्यमर्जुनात्र प्रदृश्यते |  ११   क
उत्तराः कुरवो ह्येते नात्र युद्धं प्रवर्तते ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति