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सभा पर्व
अध्याय १९
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वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु जरासन्धं समर्चय़न् |  २०   क
पर्यग्नि कुर्वंश्च नृपं द्विरदस्थं पुरोहिताः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति