स्वर्गारोहण पर्व  अध्याय ५

जनमेजय़ उवाच

धृष्टकेतुर्जय़त्सेनो राजा चैव स सत्यजित् |  २   क
दुर्योधनसुताश्चैव शकुनिश्चैव सौवलः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति