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वन पर्व
अध्याय २५
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वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाः साग्निहोत्राश्च तथैव च निरग्नय़ः |  १४   क
स्वाध्याय़िनो भिक्षवश्च सजपा वनवासिनः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति