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उद्योग पर्व
अध्याय २५
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युधिष्ठिर उवाच
समागताः पाण्डवाः सृञ्जय़ाश्च; जनार्दनो युय़ुधानो विराटः |  १   क
यत्ते वाक्यं धृतराष्ट्रानुशिष्टं; गावल्गणे व्रूहि तत्सूतपुत्र ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति