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शान्ति पर्व
अध्याय ६८
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भीष्म उवाच
नाक्रुष्टं सहते कश्चित्कुतो हस्तस्य लङ्घनम् |  ३१   क
यदि राजा मनुष्येषु त्राता भवति धार्मिकः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति