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शल्य पर्व
अध्याय ३१
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सञ्जय़ उवाच
जय़द्रथस्य शूरस्य भगदत्तस्य चोभय़ोः |  १९   क
मद्रराजस्य शल्यस्य भूरिश्रवस एव च ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति