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द्रोण पर्व
अध्याय २५
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सञ्जय़ उवाच
तेष्वनीकेषु सर्वेषु विद्रवत्सु समन्ततः |  १९   क
प्राग्ज्योतिषस्ततो भीमं कुञ्जरेण समाद्रवत् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति