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द्रोण पर्व
अध्याय २५
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सञ्जय़ उवाच
गोपाल इव दण्डेन यथा पशुगणान्वने |  ५४   क
आवेष्टय़त तां सेनां भगदत्तस्तथा मुहुः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति