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शान्ति पर्व
अध्याय २५०
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नारद उवाच
एवं मृत्युर्देवसृष्टा प्रजानां; प्राप्ते काले संहरन्ती यथावत् |  ४१   क
तस्याश्चैव व्याधय़स्तेऽश्रुपाताः; प्राप्ते काले संहरन्तीह जन्तून् ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति