शान्ति पर्व  अध्याय २५२

युधिष्ठिर उवाच

भूय़ांसो हृदय़े ये मे प्रश्नास्ते व्याहृतास्त्वय़ा |  २   क
इममन्यं प्रवक्ष्यामि न राजन्विग्रहादिव ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति