वन पर्व  अध्याय ८१

पुलस्त्य उवाच

पुण्यमाहुः कुरुक्षेत्रं कुरुक्षेत्रात्सरस्वतीम् |  १२५   क
सरस्वत्याश्च तीर्थानि तीर्थेभ्यश्च पृथूदकम् ||  १२५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति