अनुशासन पर्व  अध्याय ३७

भीष्म उवाच

पर्याय़ेण विशुद्धेन सुनिर्णिक्तेन कर्मणा |  १९   क
एवं गृहस्थः कर्माणि कुर्वन्धर्मान्न हीय़ते ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति