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शान्ति पर्व
अध्याय २५३
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भीष्म उवाच
जातपक्षांश्च सोऽपश्यदुड्डीनान्पुनरागतान् |  ३२   क
साय़ं साय़ं द्विजान्विप्रो न चाकम्पत जाजलिः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति