menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २५३
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
पुरा हि निर्भर्त्सनदण्डमोहिता; प्रमूढचित्ता वदनेन शुष्यता |  १८   क
ददाति कस्मैचिदनर्हते तनुं; वराज्यपूर्णामिव भस्मनि स्रुचम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति