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उद्योग पर्व
अध्याय ३५
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विदुर उवाच
अनसूय़ः कृतप्रज्ञः शोभनान्याचरन्सदा |  ५५   क
अकृच्छ्रात्सुखमाप्नोति सर्वत्र च विराजते ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति