शान्ति पर्व  अध्याय २५४

भीष्म उवाच

यस्मादुद्विजते लोकः सर्पाद्वेश्मगतादिव |  ३१   क
न स धर्ममवाप्नोति इह लोके परत्र च ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति