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शान्ति पर्व
अध्याय २५४
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भीष्म उवाच
स एव सुभगो भूत्वा पुनर्भवति दुर्भगः |  ३४   क
व्यापत्तिं कर्मणां दृष्ट्वा जुगुप्सन्ति जनाः सदा ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति