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शान्ति पर्व
अध्याय २५४
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भीष्म उवाच
अदंशमशके देशे सुखं संवर्धितान्पशून् |  ४२   क
तांश्च मातुः प्रिय़ाञ्जानन्नाक्रम्य वहुधा नराः |  ४२   ख
वहुदंशकुशान्देशान्नय़न्ति वहुकर्दमान् ||  ४२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति