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शान्ति पर्व
अध्याय २५४
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भीष्म उवाच
शतं चैकं च रोगाणां सर्वभूतेष्वपातय़न् |  ४७   क
ऋषय़स्ते महाभागाः प्रजास्वेव हि जाजले |  ४७   ख
भ्रूणहं नहुषं त्वाहुर्न ते होष्यामहे हविः ||  ४७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति