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शान्ति पर्व
अध्याय २५४
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भीष्म उवाच
वेदाहं जाजले धर्मं सरहस्यं सनातनम् |  ५   क
सर्वभूतहितं मैत्रं पुराणं यं जना विदुः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति